मैं व्यथित हूँ मैं विवश हूँ
मैं अस्तित्व की कशमकश हूँ
सोचता हूँ किस लिए बनी है मेरी काया
सेवा तेरी क्या यही जीवनोद्देश्य मेरा
बापू ने जब था संग तेरे मुझको भेजा
क्या यही तब निष्प्राण जीवन
प्रणय लीला की तेरे
बनी रहूं अब मैं उतरन
मैं अस्तित्व की कशमकश हूँ
सोचता हूँ किस लिए बनी है मेरी काया
सेवा तेरी क्या यही जीवनोद्देश्य मेरा
बापू ने जब था संग तेरे मुझको भेजा
क्या यही तब निष्प्राण जीवन
प्रणय लीला की तेरे
बनी रहूं अब मैं उतरन
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